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कंप्यूटर फंडामेंटल: कंप्यूटर की पीढ़ियां

 कंप्यूटर की पीढ़ियां

कंप्यूटर की पीढ़ियों में हम कंप्यूटर के तकनीकी विकास के बारे में पढ़ते हैं। कंप्यूटर में कौन से नई तकनीक जोड़ी गई ,उसकी गति कितनी बढ़ी,आकार कितना था ,उसके कलपुर्जे कैसे बने थे ,इन सभी का अध्ययन कंप्यूटर के पीढ़ियों के अंतर्गत किया जाता है।



मुख्यतः कंप्यूटर को 5 पीढ़ियों में बाँट कर पढ़ सकते हैं- 

  • पहली पीढ़ी -  1946-1956 ईस्वी तक
  • दूसरी पीढ़ी-  1956-1964 ईस्वी तक
  • तीसरी पीढ़ी- 1964-1971 ईस्वी तक
  • चौथी पीढ़ी - 1971 - वर्तमान 
  • पांचवी पीढ़ी - वर्तमान से भविष्य तक
कंप्यूटर की पहली पीढ़ी(1946-1956 ईस्वी तक )

सन 1946 से 1956 तक जितने भी कंप्यूटर बने उसे इस विधि के अंतर्गत रखा जाता है। पहली पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बड़े थे। कलपुर्जे के रूप में वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया गया था। वेक्यूम ट्यूब कांच की बनी एक निर्वात नली होती थी जिसका प्रयोग परिपथ बनाने में किया गया था। वेक्यूम ट्यूब ज्यादा गर्म ना हो जाए इसके लिए बहुत सारे एयर कंडीशनर लगाए गए थे।
इस पीढ़ी के कंप्यूटर की कुछ विशेषताएं निम्न है- 
  • यह विशेष उद्देश्य का कंप्यूटर था।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर का आकार बहुत बड़ा था।
  • यह पोर्टेबल नहीं था जिसे कहीं भी ले जाया जा सके।
  • इसकी संग्रहण क्षमता कम थी।
  • प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में मशीनी भाषा एवं असेंबली भाषा का प्रयोग किया गया था जिसके कारण कोई भी इसे चला नहीं सकता था।
  • इसकी स्पीड काफी कम थी।
  • प्रथम पीढ़ी में स्टोरेज के रूप में मैग्नेटिक ड्रम का प्रयोग किया गया था
  • बिजली की खपत अधिक होती थी।
कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी(1956 -1964 ईस्वी तक )

कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी में वेक्यूम ट्यूब की जगह पर ट्रांजिस्टर का कलपुर्जे के रूप में प्रयोग किया गया था। ट्रांजिस्टर का प्रयोग किए जाने के कारण इसका आकार पहली पीढ़ी से छोटी, ज्यादा तेज ,सस्ता और ज्यादा विश्वसनीय हो गई।

इस पीढ़ी की प्रमुख विशेषताएं निम्न थी-
  • इसका आकार पहली पीढ़ी के अपेक्षा छोटा था किंतु अब भी आकार बड़ा था।
  • इस पीढ़ी में ट्रांजिस्टर का प्रयोग किए जाने के कारण बिजली की कम खपत हुई।
  •  पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का अपेक्षा ज्यादा तेज था।
  • कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के रूप में असेंबली ,कोबोल ,फ़ॉरट्रान जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का प्रयोग किया गया था ।
  • स्टोरेज के रूप में मैग्नेटिक कोर का प्रयोग किया गया था।
 तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर(1964-1971 ईस्वी तक ) 
 
तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर की जगह पर आईसी का प्रयोग किया गया था।  आई सी का मतलब इंटीग्रेटेड सर्किट जोकि अर्धचालक पदार्थ जैसे सिलिकॉन से बनी एक छोटा सा चिप था। एक छोटे से चिप में पूरा परिपथ समाहित कर दिया गया जिससे इसका आकार कई गुना छोटा हो गया।

इनकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थी - 
  • यह द्वितीय पीढ़ी की कंप्यूटर की अपेक्षा इसका आकार छोटा एवं वजन कम था।
  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ज्यादा तेज ,सस्ता एवं ज्यादा विश्वसनीय थे।
  • अधिक पोर्टेबल एवं आसान रखरखाव
  • हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का प्रयोग
चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर(1971 - वर्तमान तक ) 

 चतुर्थ पीढ़ी में ऐसा तकनीक विकसित किया गया जिसमें बहुत सारे आईसी को जोड़ा जा सका। इस तकनीक में 30000 ट्रांजिस्टर का काम एक छोटे से आईसी चिप में समाहित कर दिया गया जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहा जाता है।

इस पीढ़ी के कंप्यूटर के मुख्य विशेषताएं-
  • वेरी लार्ज स्केल ऑफ इंटीग्रेशन (VLSI)का प्रयोग
  • कंप्यूटर का आकार कई गुना छोटा और वजन कम हो गया।
  • अन्य पीढ़ी की अपेक्षा या ज्यादा तेज ,अधिक संग्रहण क्षमता वाला तथा अधिक विश्वसनीय कंप्यूटर था।
  • कंप्यूटर काफी सस्ता हो गया जिसे आम आदमी भी खरीद सकता था।
  • कंप्यूटर के नेटवर्क का विकास हुआ।

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर(वर्तमान से भविष्य तक ) 

पांचवी पीढ़ी का कंप्यूटर वर्तमान में उपयोग में लाए जाने वाले शक्तिशाली कंप्यूटर से लेकर भविष्य में आने वाले कंप्यूटर को शामिल किया गया है।
इस पीढ़ी की प्रमुख विशेषताएं निम्न है- 
  • अल्ट्रा लार्ज स्केल ऑफ इंटीग्रेशन का प्रयोग
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग
  • आकार में कमी

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