सेकेंडरी मेमोरी /स्टोरेज
कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी में हम डाटा को स्थाई रूप से स्टोर कर सकते हैं , यह वह जगह होता है जहां पर सिस्टम के सारे प्रोग्राम और आपकी सभी प्रकार की डाटा मौजूद होते हैं।
इसे हम मुख्य रूप से दो प्रकार से वर्गीकृत कर सकते है 1.फिक्स्ड स्टोरेज 2.रिमूवल स्टोरेज
सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस निम्न है -
- मेग्नेटिक टेप - ऑडियो कैसेट, वीडियो कैसेट
- मेग्नेटिक डिस्क - फ्लॉपी डिस्क ड्राइव, हार्ड डिस्क ड्राइव ।
- ऑप्टिकल डिस्क - सीडी,डीवीडी,बीडी
- मेमोरी कार्ड - एसडी कार्ड ,मल्टीमीडिया कार्ड
- यूएसबी ड्राइव्स - पेन ड्राइव
मेग्नेटिप टेप
यह एक सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जो पहले डाटा संग्रहित करने के लिए उपयोग में लाया जाता था । यह नायलॉन की बनी लंबी पट्टी होती थी , जिसमें चुम्बकीय पदार्थ का लेपन किया हुआ रहता था । इसी पट्टी में डाटा को स्टोर किया जाता था इसमें
- क्रमिक डाटा एक्सेस विधि
- नॉन वोलेटाइल स्टोरेज
- ऑडियो और वीडियो डाटा स्टोर कर सकते है ।
- यह सस्ता एवं ज्यादा नाजुक
- अन्य स्टोरेज के अपेक्षा कम मात्रा में डाटा स्टोर कर सकते हैं।
मैग्नेटिक डिस्क
मैग्नेटिक डिस्क का आकार वृत्ताकार होता है जिसमें चुंबकीय पदार्थ का लेपन लगा हुआ रहता है, इसे ही डिस्क कहा जाता है। इसी डिस्क में डाटा को संग्रहित किया जाता है। मैग्नेटिक डिस्क के उदाहरण हैं- फ्लॉपी डिस्क एवं हार्ड डिस्क
फ्लॉपी डिस्क ड्राइव
फ्लॉपी डिस्क नॉन वोलेटाइल सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है , जो नायलॉन से बनी पतली वृत्ताकार में डाटा को संग्रहित कर सकते है ।
फ्लॉपी डिस्क में डाटा संग्रहण के लिए या उसमें मौजूद डाटा को देखने के लिए ड्राइवर को जरूरत होती है , जिसे फ्लॉपी डिस्क ड्राइव कहा जाता है ।
फ्लॉपी ड्राइव की भौतिक संरचना -
फ्लॉपी ड्राइव नायलॉन पदार्थ से बना वृत्ताकार चकती होता है , जिसमे चुम्बईकीय पदार्थ का लेपन किया गया होता है । इसी में डाटा को संग्रहीत करके रखा जाता है । इसे खरोंच आदि से बचाने के लिए एक प्लास्टिक के कवर से ढँका हुआ रहता है जिसे प्लस्टिक जैकेट कहा जाता है । राइट प्रोटेक्ट नोच किसी अन्य यूजर से डाटा को राइट करने से सुरक्षा प्रदान करता है , जिसे आवश्कतानुसार बंद या खुला रखा जा सकता है ।
फ्लॉपी डिस्क के प्रकार
- स्टैण्डर्ड फ्लॉपी - 8 इंच क्षमता - 100 kb से कम
- माइक्रो फ्लॉपी - 5.25 इंच क्षमता - 100 kb से 1.20 mb
- मिनी फ्लॉपी - 3.25 इंच क्षमता - 400kb से 1.44 mb
हार्ड डिस्क ड्राइव
हार्ड डिस्क धातु से बनी वृत्ताकार चकती होती है , जिसमें चुम्बकीय पदार्थ का लेपन लगा हुआ रहता है । यह एक नॉन वोलेटाइल स्टोरेज डिवाइस होता है , जिसमें अधिक मात्रा में डाटा को संग्रहीत करके रखा जा सकता है ।
हार्ड डिस्क एक फिक्स्ड स्टोरेज डिवाइस होता है ,जिसे सीधे मदरबोर्ड से जोड़ा गया होता है । हार्ड डिस्क में कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम , इंस्टॉल प्रोग्राम एवं अन्य यूजर डाटा को संग्रहीत करके रखा जाता है ।
पॉकेट हार्ड डिस्क अन्य प्रकार का हार्ड डिस्क होता है जिसे आप बाह्य रूप से कंप्यूटर से जोड़ा जा सकता है । इसका उपयोग में डाटा बैकअप हेतु उपयोग में लाया जाता है ।
हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना -
हार्ड डिस्क की धातु से बनी वृत्ताकार चकती को प्लेटर्स कहा जाता है । यह प्लेटर्स एक लंबी आकार की धातु से बनी डण्डी जिसे स्पिंडल कहा जाता है , उसमें पिरोया जाता है । प्रत्येक प्लेटर्स में मौजूद डाटा को देखने एवं डाटा संग्रहण हेतु हेड लगा हुआ रहता है । जब डाटा रीड एवं राइट किया जाता है तो प्लेटर्स तेजी के साथ घूमता है ।
हार्ड डिस्क में डाटा संग्रहण -
हार्ड डिस्क के प्लेटर्स में डाटा संग्रहीत किया जाता है ,प्लेटर्स के ऊपरी एवं नीचे दोनों परत में डाटा को संग्रहीत कर सकते है । यह प्लेटर्स को कई ट्रैक में और ट्रैक को सेक्टर में विभाजित किया जाता है । सेक्टर के क्लस्टर में विभाजित किया जाता है । इन्ही कलस्टर में डाटा संग्रहीत किया जाता है ।
ऑप्टिकल डिस्क -
यह एक सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जो लेजर किरणों की मदद से डाटा का संग्रहण एवं मौजूद डाटा को देखा जा सकता है। इसका आकार काफी छोटा होता है जिसकी मदद से आप आसानी के साथ डाटा का स्थानांतरण कर सकते हैं। यह बहुत ही सस्ता एवं पोर्टेबल स्टोरेज डिवाइस है।
कॉम्पैक्ट डिस्क (compact disk )
इसे संक्षिप्त रूप में सीडी कहा जाता है।यह एक स्टोरेज डिवाइस है जिसमें 700 एमबी डाटा संग्रहित किया जा सकता है ।
सीडी डिस्क को चलाने के लिए सीडी ड्राइव की आवश्यकता पड़ती है। यदि आपकी कंप्यूटर में सीधी ड्राइव लगा हुआ नहीं है तो आप डाटा संग्रहित कर सकते हैं ना उसमें मौजूद डाटा को देख सकते हैं।
सीडी के प्रकार
सीडी रोम(CD-ROM) - इस प्रकार के सीडी का उपयोग सीडी बनाने वाला ही करता है, जिसमें डेटा उसी समय ही संग्रहित कर दिया जाता है ,जब यह बन रहा होता है। एक बार संग्रहित करने के बाद इसमें और किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं कर सकते हैं। इसे केवल एक बार ही उपयोग में लाया जा सकता
है।
सीडी-आर(CD-R)
यह एक सामान्य प्रकार का सीडी होता है , जिसमें एक बार डाटा संग्रहीत करने के बाद दुबारा नहीं कर सकते । इसे एक बार ही उपयोग में लाया जा सकता है ।
सीडी - आरडब्ल्यू (CD-RW)
इसका पूरा नाम कॉम्पैक्ट डिस्क रीराइटेबल होता है । इसे बार बार उपयोग में लाया जा सकता है ।
डीवीडी (DVD)
इसका पूरा नाम डिजिटल वर्सटाइल डिस्क होता है । इसमें सभी प्रकार के डाटा टेक्स्ट,इमेजेस, ऑडियो एवं वीडियो को संग्रहीत किया जा सकता है ।
यह भी दो प्रकार का होता है -
1.डीवीडी -आर (DVD-R) - इसे केवल एक ही बार उपयोग में लाया जा सकता हूं ।
2.डीवीडी -आरडब्ल्यू (DVD-RW) -इसे बार बार उपयोग में लाया जा सकता है । कई बार डाटा को संग्रहीत एवं मिटा सकते है ।
CD - compact disk क्षमता - 700 MB
DVD - digital versatile disk क्षमता - 4.7 GB
BD - blue ray disk क्षमता - 25 से 40 GB
HVD - holographic versatile disk
फ़्लैश ड्राइव
फ्लैश ड्राइव एक प्रकार का ठोस उस छोटे आकार का डाटा स्टोरेज डिवाइस होते हैं, जिस में मौजूद डाटा का संरक्षण हेतु बाह्य स्रोत से बिजली की आवश्कता नहीं पड़ती ।
इनका उपयोग मुख्य रूप से पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एवं रिमूवल स्टोरेज डिवाइस में किया जाता है ।
यदि हम अन्य ठोस अवस्था तकनीकी वाले स्टोरेज डिवाइस की तुलना इससे करें तो भौतिक रूप से इसका आकार छोटा, उच्च डाटा संग्रहण एवं सस्ता होता है।
यह इलेक्ट्रानिकली इरेजिबल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी की तरह ही काम करता है । जिसमें डाटा को रोकें रखने हेतु बिजली की आवश्यकता नहीं होती।
फ्लैश मेमोरी के उदाहरण - विभिन्न प्रकार के मेमोरी कार्ड एवं एस एस डी कार्ड फ्लैश मेमोरी के ही उदाहरण है।
मेमोरी कॉर्ड
मेमोरी कार्ड आकार में सबसे छोटा एवं अधिक मात्रा में डाटा के स्टोर कर सकता है। यह एक नॉन वोलेटाइल स्टोरेज डिवाइस है । मेमोरी कार्ड का प्रयोग मोबाइल फोन एवं डिजिटल कैमरा में प्रयोग में लाया जाता है ।
यह 2 जीबी से लेकर 128 जीबी तक कि क्षमता होती है , जिसे अपनी आवश्कयतानुसार प्रयोग में लाया जा सकता है ।



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