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Foxpro : फॉक्सप्रो डाटा टाइप

  फॉक्सप्रो डाटा टाइप(Data Type) जब एक ही प्रकार के गुण और विशेषता रखने वाले डाटा का एक ग्रुप बनाया जाता है तो उसे डाटा टाइप्स कहते हैं फॉक्सप्रो में निम्न प्रकार के डाटा टाइप होते हैं- कैरक्टर्स(characters) यह एक नॉन न्यूमैरिक डाटा टाइप होता है जिसमें अंकगणितीय क्रियाएं जैसे जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग नहीं किया जा सकता। कैरेक्टर प्रकार के डाटा टाइप में अक्षर A-Z  या a-z एवं 0-9 के अंक शामिल होते है । यह डाटा टाइप अधिकतम 254 अक्षर ले सकता है। इसकी डिफॉल्ट चौड़ाई 10 होती है। नंबर(number) यह न्यूमैरिक प्रकार का डाटा टाइप होता है जिसमें अंकगणितीय क्रियाएं कर सकते हैं।  इसमें 0 से 9 तक के अंक लिए जाते हैं। इस डाटा टाइप में धनात्मक ,ऋणात्मक, दशमलव संख्या शामिल किया जाता है । दशमलव  के बाद 2 अंक तक प्रदर्शित करता है। यह डाटा टाइप अधिकतम 20 अंकों को स्वीकार करने की क्षमता होता है। फ्लोटिंग(floating) यह भी न्यूमैरिक प्रकार का डाटा टाइप है। फ्लोटिंग और नंबर डाटा टाइप में प्रमुख अंतर यह है कि या अधिक शुद्ध मान प्रदर्शित करता है। दशमलव के बात जितने भी अंक होते हैं, सभी को प्रदर्श...
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फॉक्सप्रो : परिचय, विशेषताएं एवं संस्करण

  फॉक्सप्रो (foxpro) फॉक्सप्रो माइक्रोसॉफ्ट की डेटाबेस हैंडलिंग एवं कमांड आधारित पावरफुल सॉफ्टवेयर है । इसमें ना केवल डाटाबेस प्रबंधन संबंधी सुविधाएँ हैं बल्कि इसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की तरह भी उपयोग में लाया जा सकता है । इसकी मदद से एप्लीकेशन डेवेलोप किया जा सकता है । फॉक्सप्रो को RDBMS कहा जाता है । RDBMS का मतलब Relational Databse Managemet System है ।  DBMS क्या है ??? डीबीएमएस शब्द मुख्य रूप से तीन शब्दों से मिलकर बना है-  DB मतलब databse   M मतलब management S मतलब system   जो भी कंप्यूटर में इनपुट कराया जाता है उसे डाटा कहते हैं जैसे राम ,101,श्याम,जशपुर , कुनकुरी,201 ।  ऊपर दिए गए उदाहरण में डाटा अव्यवस्थित है ,यदि हम इसे एक गुण वाले डाटा को एक ही जगह पर रखेगे तो , क्या होगा देखें - जैसे -  नाम - राम ,श्याम स्थान - जशपुर , कुनकुरी  नॉ - 101,201  एक जैसे गुण वाले डाटा को इसी प्रकार से व्यवस्थित किया जा सकता है ।इसके लिए हम एक सारणी बना सकते हैं ,जो निम्न प्रकार से हो सकता है-  उपर्युक्त सारणी में 3 कॉलम बनाया गया है। प...

ऑपरेटिंग सिस्टम: ऑपरेटिंग सिस्टम परिचय एवं इसके कार्य

  ऑपरेटिंग सिस्टम ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है, जो कंप्यूटर एवं हार्डवेयर के बीच संवाद स्थापित करने में मदद करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में सबसे पहले लोड होता है और कंप्यूटर को कार्य करने की स्थिति तक लाता है। यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को एक आधार देता है जिससे कोई यूजर अपना कार्य कर सकें। ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य- Resource manager -कंप्यूटर हार्डवेयर से जुड़े विभिन्न डिवाइस जैसे मॉनिटर, कीबोर्ड ,माउस ,प्रिंटर के बीच किसी कार्य को करने के लिए समन्वय स्थापित करता है। Application software management -यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को एक आधार देता है जिससे कोई यूजर कार्य कर सकें। Procrssing management -जब यूजर के द्वारा कोई कार्य दिया जाता है ,तो कार्य को पूरा करने के लिए प्राथमिकता का निर्धारण ऑपरेटिंग सिस्टम करता है। Memory management -सिस्टम से जुड़े किसी भी प्रकार के संसाधन के लिए जरूरी मेमोरी का वितरण करता है। File management -सिस्टम में बनी फाइल को व्यवस्थित करता है ,जिससे यूजर उसे आसानी के साथ एक्सेस सके। Secuirity -ऑपरेटिंग सिस्टम अनाधिकृत यूजर को एक्सेस से रोकत...

कंप्यूटर फंडामेंटल: मालवेयर(malware) प्रोग्राम

  मालवेयर (malware ) प्रोग्राम   ऐसे प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर जो आपकी सिस्टम को नुकसान पहुँचने के उद्देश्य से बनाया गया होता है । यह आपके कंप्यूटर डेटा को मिटा या चुरा सकता है । ऐसे प्रोग्राम को मालवेयर कहा जाता है । मालवेयर (malware) प्रोग्राम के उदाहरण -  कंप्यूटर वायरस(computer virus) ट्रॉन्जन(trojans) बॉम्ब्स(Bombs) वर्म्स(worms) स्पाई वेयर (spyware) रेनसमवेयर (ransomeware) एडवेयर (adware) कंप्यूटर वायरस   एक  मालवेयर प्रोग्राम ही होता है किंतु इसका प्रमुख उद्देश्य कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाना होता है। इस प्रकार के प्रोग्राम को मालवेयर(malware) प्रोग्राम भी कहा जाता है। यह वायरस की तरह अपने आप को कॉपी करके दोगुना करते जाता है और और कंप्यूटर के मेमोरी को भरते जाता है। कंप्यूटर वायरस समानता डाटा को मिटाना ,कॉपी करना ,किसी फाइल का नाम बदलना एवं हार्ड डिस्क को फॉर्मेट कर देना जैसा कार्य कर सकता है। कंप्यूटर वायरस का इतिहास सन 1971 में पहला कंप्यूटर वायरस देखा गया था जिसे क्रीपर सिस्टम (creeper system) नाम दिया गया था। यह अपने आप को कॉपी करके हार्ड डिस्क को को...

कंप्यूटर फंडामेंटल: इनपुट डिवाइस

  इनपुट डिवाइस इनपुट डिवाइस डिवाइस होता है जो उपयोगकर्ता के द्वारा दिए गए निर्देश या डेटा को कंप्यूटर के समझने लायक भाषा में बदलता करता है अर्थात उसे बायनरी में बदल देता है। निम्नलिखित प्रकार के इनपुट डिवाइस होते हैं - कीबोर्ड  माउस ट्रैक बॉल जॉयस्टिक स्कैनर   कीबोर्ड(keyboard) कीबोर्ड एक टाइपिंग इनपुट डिवाइस से जिसमें हम टेक्स्ट डेटा को लिखकर  इनपुट करा सकते हैं, जिसमें बहुत सारे बटन बने होते हैं। इन बटन के ऊपर अक्षर लिखा हुआ होता है ,जब हम किसी बटन को दबाते हैं तो यह बायनरी कोड बदलकर  डेटा सीपीयू तक पहुंचाता है ।   कीबोर्ड के बटन को मुख्य रूप से निम्न भागों में बांटा जा सकता है- 1. फंक्शन की(function key) - f1 -f12 तक के बटन को फंक्शन की कहा जाता है, यह कीबोर्ड के सबसे ऊपरी हिस्से में होता है।इसे यूजर डिफाइन की भी कहा जाता है। फंक्शन की के कार्य पूर्व निर्धारित होते हैं ,जिसके कार्य अलग-अलग प्रोग्राम के लिए अलग-अलग होता है ।उपयोगकर्ता चाहे तो इनकी कार्य को अपने  जरूरत अनुसार बदल सकता है। 2.न्यूमेरिक की पैड (numeric keypad) - अंकगणित  कार्य करने...

कंप्यूटर फंडामेंटल : कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी/स्टोरेज

  सेकेंडरी मेमोरी /स्टोरेज   कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी में हम डाटा को स्थाई रूप से स्टोर कर सकते हैं , यह वह जगह होता है जहां पर सिस्टम के सारे प्रोग्राम और आपकी सभी प्रकार की डाटा मौजूद होते हैं। इसे हम मुख्य रूप से दो प्रकार से वर्गीकृत कर सकते है 1.फिक्स्ड स्टोरेज 2.रिमूवल स्टोरेज सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस निम्न है -  मेग्नेटिक टेप - ऑडियो कैसेट, वीडियो कैसेट मेग्नेटिक डिस्क - फ्लॉपी डिस्क ड्राइव, हार्ड डिस्क ड्राइव । ऑप्टिकल डिस्क - सीडी,डीवीडी,बीडी  मेमोरी कार्ड - एसडी कार्ड ,मल्टीमीडिया कार्ड यूएसबी ड्राइव्स - पेन ड्राइव  मेग्नेटिप टेप  यह एक सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जो पहले डाटा संग्रहित करने के लिए उपयोग में लाया जाता था । यह नायलॉन की बनी लंबी पट्टी होती थी , जिसमें चुम्बकीय पदार्थ का लेपन किया हुआ रहता था । इसी पट्टी में डाटा को स्टोर किया जाता था इसमें  क्रमिक डाटा एक्सेस विधि नॉन वोलेटाइल स्टोरेज ऑडियो और वीडियो डाटा स्टोर कर सकते है । यह सस्ता एवं ज्यादा नाजुक  अन्य स्टोरेज के अपेक्षा कम मात्रा में डाटा स्टोर कर सकते हैं।...

कंप्यूटर फंडामेंटल: कंप्यूटर की प्राथमिक मेमोरी

  कंप्यूटर की प्राथमिक मेमोरी कंप्यूटर की प्राथमिक मेमोरी वह मेमोरी होती है जो किसी प्रोसेस के दौरान डाटा ,सूचना या प्रोग्राम को  संग्रहित करके रखता है। इसे वर्किंग मेमोरी कहा जाता है। कंप्यूटर की मेमोरी साइज की सबसे छोटी इकाई बिट्स होता है आप नीचे मेमोरी साइज के बारे में जान सकते हैं- 8 bits = 1 byte 4 bits = 1 nibbles 1024 byte= 1kb 1024 kb = 1 Mb 1024 Mb= 1Gb 1024 Gb = 1 TB 1024 TB = 1 PB प्राथमिक मेमोरी निम्न प्रकार के होते हैं-  रैम (RAM) रोम(ROM) कैश(cache)  रजिस्टर(register) रेंडम एक्सेस मेमोरी(Randon access memory) यहा एक प्राथमिक मेमोरी है ,जो प्रोसेस के दौरान प्रोग्राम ,डाटा या किसी प्रकार की सूचना को अस्थाई रूप से संग्रहित करके रखती हैं, जिसे आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कराती है। कंप्यूटर के बंद होने पर या बिजली चले जाने पर रैम में संग्रहित डाटा वहां से हट जाती है। इसलिए इसे आई स्थाई मेमोरी कहा जाता है ।इंग्लिश में इसे वोलेटाइल (volatile)मेमोरी कहा जाता है। रैम के विभिन्न प्रकार(types of Ram)- डायनामिक रैम(Dynamic Ram) सिंक्रोनस डीरैम (Synchronous Dram) स्टै...